Poetry

□ ■ Dreams of Night □ ■

सवा पहर का रात वो ..
वक्त टूटी ..नींद छुटी,
आवाज दे गए थे शायद,
देखा सिरहाने कुछ लब्ज थे परे,
गुनगुनाये तेरे, कह गए बात कुछ !

बीती रात का भ्रम सही या,
या सुबह होने का सच था खड़ा !

चले गए थे .. ख्वाब के तरह..
वो ख्वाब जो टूटता है रोज,
संवर जाता रोज अपने टुकड़े सहेज के,
फिदरत सी है उसे टूट जाने की,
आदत सी चुप हो जाने की !

फिर भी क्योँ इंतेजार है उसे रात का,
कुछ भूली बिसरी बात का,
जो भले तोड़े उसे, छोड़े उसे !

फिर पहर रात की होने को,
एक ख्वाब खड़ा फिर सजने को !

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Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky – मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . “यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : – सुजीत भारद्वाज

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