Poetry

जिंदगी आखिर जिंदगी ही है..

एक संगीत कभी सुमधुर तानो भरा,
कभी अनसुना विस्मित रागों सना !

एक हँसी कभी खुशी लहरों भरा,
कभी व्यंग्य के उपहासो से जना !

एक क्रंदन कभी नयनों में भरा !
कभी रुदन आद्र मन में बना !

एक ख्वाब कभी पलकों में भरा,
कभी वह पतझर पंछी बन उड़ा !

सवाल ख़ामोशी के साया में परा,
राहों में उलझे, पग पग पर है पाषाण जड़ा !

तूफां और नाकामी, मंजिल पर खड़ा !
कब डरा, कब रुका .. ??
जिंदगी आखिर जिंदगी, तेरे संग मैं चला !

सुजीत भारद्वाज

Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky – मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . “यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : – सुजीत भारद्वाज

http://www.sujitkumar.in/

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