क्या गुनाह है .. ?

है रात मुफलिसी की,ताक पर लगा नींदों को,और लगा चैन के हर कोने,चाहत सुबहों पर लगाना ! क्या गुनाह है .. ? माना नसीबों पर नहीं इख्तियार,और उम्मीदों के कितने …

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जिंदगी आखिर जिंदगी ही है..

एक संगीत कभी सुमधुर तानो भरा,कभी अनसुना विस्मित रागों सना ! एक हँसी कभी खुशी लहरों भरा,कभी व्यंग्य के उपहासो से जना ! एक क्रंदन कभी नयनों में भरा !कभी …

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