Words of Night – In Night & Pen

ऐसे तो कुछ कहीं बातें थी उस दिन,
जैसे अनमने ढंग से टालने की कोशिश और मन समझ लेता दूर उठते हर तरंगों को !
उस दिन पूछ ही लिया, की रोज तो मन झुंझला कर मैं, खुद समझा कर सो ही जाता था, रात की गोद में अनेकों अधूरे बातों को लिये !
जाने अनजाने आदत सी थी पूछ लेने की, उस पर निरुतर खामोशी, उस दिन जैसे झगड़ सा गया, जैसे सोच ही लिया था, अब कुछ हरकतें नही होगी,
किताबों को सिरहाने लिये चला ही था नींद को बुलाने, कुछ हाल चल सी बातों ने कहना शुरू किया, बातें वहीँ थी जिंदगी की कशमकश को लिये,
जिसे में जानता ही था, समझता ही था !
फिर बहलाने की सिवा, कुछ बातें बड़ी बड़ी जिंदगी के वसूलों और जिंदगी के रास्तों को जीने की कवायद,
दार्शनिक सा ज्ञान भरी बातें जो वस्तिकता से परे, खोखली सी हँसी के सहारे में कहता गया कहता रहा .. मैं भी खुद गुमानम था, जिसे ने राह की खबर वो रास्ता क्या बताये,
कैसे हाथ पकड़, चलने की सीख दे; पर शायद कुछ हिम्मत दे सकता था, की अँधेरा हो पर आगे चल के सवेरा हो.. कुछ बढ़ो मंजिल की तरफ, मेरी नाकामी ही सही,
कुछ उम्मीद तो बांध लो मेरी बातों से.. और रात बीतता गया इन बातों से एक नए सवेरे की उम्मीद लिये, मेरे लिये ना सही किसी और के लिये ही !
#Sujit