Poetry

हर सातवें दिन – Night & Pen

आज यादों के कारवां से फिर वही सख्स,जैसे कल की हो तकरार !और हर दफा वो जाने के कोशिश करता की,इस बार नही लौट आने को,और उसकी ये नाकाम कोशिश साफ़, दिख जाती उसके चेहरों पर; ! बेवजह ही सवाल वो अक्सर दुहराता जाता, जिसके जवाब खुद उससे ही गुजरते है ..झट से वो डायरी के खोये […]

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Words of Night – In Night & Pen

ऐसे तो कुछ कहीं बातें थी उस दिन, जैसे अनमने ढंग से टालने की कोशिश और मन समझ लेता दूर उठते हर तरंगों को !उस दिन पूछ ही लिया, की रोज तो मन झुंझला कर मैं, खुद समझा कर सो ही जाता था, रात की गोद में अनेकों अधूरे बातों को लिये !जाने अनजाने आदत […]