spring season
Poetry

वसंत की ताक में ….

spring seasonजाती हुई ठण्ड, पछिया हवा के थपेड़े,
किसी रूठी हुई प्रेमिका की तरह का दिन,
दोपहर जैसे खामोश और चिरचिरा,
न कुछ बोलता न कुछ सुनना ही चाहता !

वो दूर खेतों में मक्के मटरगस्ती करते,
जैसे दूर से हमें चिढ़ाते हुए देखते,
बिखरे बिखरे बालों पर जमी धुल,
जैसे उजड़ा हुआ सा घर कोई !

उबासी से ऊँघते हुए दिन,
जैसे कब आँख लग जाये,
वसंत की ताक में बैठे सब,
वो आये और रूठे को मनाये !

#SK

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/

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