खामोशी भी उम्र भर निभायेगें ….

sk-silence

इक जैसे चेहरे कब से,
ना भाव भंगिमा कुछ भी,
पत्थर की मूरतें हो जैसे,
सदियों से वैसे ही अब तक,
शिकवे शिकन सजते रहे चेहरों पर,
हमें इंसा होने का गुम तो बना रहता !

पढ़ें शब्द मेरे, भाव तो ना जाना,
अब चुप हो जब मेरे रूठने का,
सबब तो भी ना पहचाना !

आज थोड़ी से गुस्ताखी में दो शब्द क्या कहे !
मेरे सारे जज्बात ही झूठे हो गये पुराने !

यूँ तो कई बार खामोश होते देखा तुम्हें !
ये फ़िक्र देखो तेरे लिये आज भी नया है ..!

काफ़िर या दे दो नाम कोई…
धरती के खुदाओं ने हमे रहमत से नकारा है !

तकरार भी इक बार हो जाये तो,
हम तो खामोशी भी उम्र भर निभायेगें !

Post Author: Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज