Poetry

जमीं पर परा वो पत्ता ..

साख से कैसे छुट गया ये पत्ता,
इतना भी पुराना तो रिश्ता नहीं,
उम्र भी नहीं था रंग भी थे अभी भरे,
दरख्त ने गिरा दिया इसे कैसे !

अनेकों साखों में इसे हँसी मिल जाती,
वही रह ही जाता झुरमुटों में खोकर कहीं,
कैसे जमीं पर बिखर कर पर गया अकेला !

हाथों से इसे उठा लिया मैंने,
अपना सा लग गया जमीं पर परा वो,
सजा के कुछ देर देखा जी भर इसे,
इसे इक मुकाम मिल गया हाथों में,
शब्दों से मैंने फिर इसे जिंदगी दे दी !!

paint-leaf-sk

Thought Behind: One day I found a leaf laid on ground, I took it in hand, I kept it in front of me. Then painted above as imagination of mine, how a tree left this leaf falling … #SK – Insane Story !!

Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky – मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . “यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : – सुजीत भारद्वाज

http://www.sujitkumar.in/