Poetry

दूसरी नींद

कुछ टूटे हुए काँच खिड़कियों के,second-night-sleep
जैसे सर्द हवाओं ने रुख देखा उसमें !

आधे ऊँघे परे पेड़ कुछ दुरी पर,
और साथ उसके आसरे अंदर खोये हुए,
लिपटी चुपचाप सी रोशनी लेम्पपोस्टों की !

एक नींद आधी सवालों वाली टूट सी गयी,
कितना पहर था नजाने दूसरी नींद के वास्ते !

सिरहाने परे ख्वाबों से जी नहीं था भरा,
फिर जी चाहा रूबरू हो तुमसे एकबारगी !

पौ फट जाये बिखर जाये हर चाहत,
फिर खों जाये कहीं दूसरी नींद की आगोश में !

#SK

Image Source : http://www.michawertheim.nl/agenda/35305/

Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky – मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . “यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : – सुजीत भारद्वाज

http://www.sujitkumar.in/

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