दूसरी नींद

कुछ टूटे हुए काँच खिड़कियों के, जैसे सर्द हवाओं ने रुख देखा उसमें ! आधे ऊँघे परे पेड़ कुछ दुरी पर, और साथ उसके आसरे अंदर खोये हुए, लिपटी चुपचाप …

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ये रात …? – A Night

रात .. बात नही बस सुर्ख काले अंधेरों और दो चार दमकती चाँद तारों की…रात .. बात नही अकेली अँधेरी गलियों और सुनसान सड़कों से गुजर जाने की .. रात …

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चौथे पहर की अधूरी बातें

कुछ अधूरी सी लगती है बात,देखता हूँ रात में लिपटी,चाँद की उस सूरत को,जो आज अधूरा ही आया था… सन्नाटे छूती जाती चुपके से,बावरे से बयार उठते है,और छु जाते …

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