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पंचायत – वेब सीरीज in #LockDownDays

panchayat web seriesइस ठहरे वक़्त में कई वेब सीरीज देखने का मौका मिल रहा । देखें तो ये सीरीज दो ढाई घंटे वाले सिनेमा जिसमें पाँच गाने धूम धड़ाक कहानी के नाम पर कुछ भी पड़ोसने से हट अपनी अलग मुकाम बना रहे । वेब सीरीज इतने कंटेंट फोकस्ड है की पाँच घण्टे यूँ निकलते जैसे कोई शार्ट फ़िल्म हो ।

बात “पंचायत” की इसने सादगी से दिल को छुआ । कोई भी कहानी जब लगे की ये आपकी ही जिंदगी को बयाँ करती तो समझिये उस लेखनी ने अपना मकसद पूरा कर लिया ।  कभी कभी जिंदगी में हमें वो नहीं मिलता जो हम चाहते,  मुकम्मल जहाँ परफेक्ट लाइफ जैसी चीज सबके लिए होती ही नहीं है । होती है बस हमारा सफर उन तमाम ख्वाहिशों के बीच और फिर हम उस चीज से प्यार करने लग जातें जो हमें मिलता । ये असंतोष मलाल जैसी चीजें आती की काश ऐसा होता ये मिलता ये मिला ।  फिर हम उसी में अपनी खुशी ढूँढने लग जाते जो मिलता हमें या कहिये ठोकरों से सम्हल सम्हल कर हम जीना सिख लेते । और कोसने रोने के अलावा जो हम कर रहे उससे प्यार करना चाहिए । इन्ही सब भावनाओं के इर्द गिर्द है “पंचायत” ।

  • वेब सीरीज: पंचायत
  • स्टार कास्ट: रघुवीर यादव, नीना गुप्ता,
  • जितेंद्र कुमार, चंदन रॉय, फैसल मलिक आदि।
  • निर्देशक: दीपक कुमार मिश्र
  • सृजनकर्ता: टीवीएफ
  • प्लेटफोर्म : अमेज़न प्राइम

गाँव की पृष्टभूमि को आपके मन में जिंदा करने में कामयाब होती है पंचायत – चापाकल, बिजली समस्या, भूत प्रेत, खेत खलिहान , गाय भैंस, शादी बियाह, कुर्सी टेबल, पंचायती राज, टोला सरपंच से लेके बहुत कुछ बारीकी से पिरोई गयी है हर चीजें ।

कुछ दृश्य गुदगुदाने का भी काम बखूबी करते है तो कुछ दृश्य में भावनात्मक जुड़ाव भी महसूस होता । कहीं व्यवस्था की खीज है तो कहीं सरकारी तंत्र की जमीनी हकीकत । युवा का अकेलापन 20 हजार की बेमन से नौकरी मोबाइल फ़ोन पर दोस्तों के लाइफस्टाइल पर उठती टिस बहुत कुछ कह जाती है | गाँव की शराब दूकान , गाँव के पुलिस थाने जैसे दृश्यों को गहराई से प्रदर्शित किया गया है | बरात जब गाँव में रूकती और उस समय के परिदृश्य को उकेरने में सफल हुए है सभी |

गाँव का आथित्य सत्कार और लोगों की सादगी से रूबरू होंगें आप |  रघुवीर यादव और नीना गुप्ता ने बढ़िया काम किया है उनके तालमेल संवाद जीवंत लगते है | जितेंद्र कुमार और चंदन रॉय दोनों के काम की भी तारीफ होनी चाहिए |

पंचायत की कहानी नहीं लिख रहा क्योंकि देखने का उत्साह कम न हो जाए । हम ऐसे कहानियों को देखेंगे उत्साहवर्धन करेंगे तभी ऐसी वेब सीरीज बनती रहेगी । न मैं आलोचक हूँ की किसी के काम में कमियाँ निकालू , सभी कलाकारों ने बेहतरीन अदायगी पेश की है । छोटे से छोटे दृश्य में भी बारीकी नजर आती है और वर्तमान के युवा का अंतर्द्वंद भी झलकता है ।

तो इस लॉक डाउन काल के लिए आप भी देखिये पंचायत ।

 

~ सुजीत

Post Author: Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज