No Way back in life

मंजिल नई बनाऊँगा !

No Way back in lifeअब मैं लौट के नहीं आऊंगा ;
दृढ़ हूँ इस बार बढ़ता ही जाऊँगा ।।

अनेकों बार हुए उपेक्षित मन को ;
अब बहुत ही दुर कहीं ले जाऊँगा ।।

गत वर्षों का कुछ गीत अधूरा ;
अब उसको ना फिर दोहराऊँगा।।

साथ संग कुछ बात रही अधूरी ;
सबसे परे जीवन कहीं बिताऊँगा ।।

बन अनजाने रह किसी नगर पर ;
भले हाल कभी ना सुन पाऊँगा ।।

जब कभी दिखे किसी कहीं डगर पर ;
फिर अपनी नजरें नहीं झुकाऊँगा ।।

होते साथी तो व्यथा कथा संवाद भी होता ;
अनजानों से क्या क्या में कह पाऊँगा ।।

पथ भी व्याकुल मिलने किसी पथिक को ;
अगणित कदम बढ़ाऊँगा मंजिल नई बनाऊँगा ।।

~ Sujit

2 thoughts on “मंजिल नई बनाऊँगा !

  1. yogi saraswat

    गत वर्षों का कुछ गीत अधूरा ;
    अब उसको ना फिर दोहराऊँगा।।

    साथ संग कुछ बात रही अधूरी ;
    सबसे परे जीवन कहीं बिताऊँगा ।
    प्रेरणादायक शब्द

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