path in dark life

तमस में होता द्वार कहीं…

path in dark lifeविरह वियोग संयोग है ;
कुछ ऐसा ये तो रोग है !

मृग मारिचका सा क्षण है ;
भ्रम टूटे बस ऐसा प्रयत्न है !

यतार्थ थे तो पास भी थे ;
कृत्रिम पर अधिकार नहीं !

मन चंचल निष्प्राण हो गए ;
जीते जी पाषाण हो गए !

आहट पर सुध नहीं होती ;
मन जैसे कोई जलती अंगीठी !

तमस में होता द्वार कहीं;
जीवन का श्रृंगार यही !

– Sujit

2 thoughts on “तमस में होता द्वार कहीं…

  1. डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

    सार्थक प्रस्तुति।

    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (25-01-2015) को “मुखर होती एक मूक वेदना” (चर्चा-1869) पर भी होगी।

    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।

    बसन्तपञ्चमी की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ…
    सादर…!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’

  2. yogi saraswat

    मन चंचल निष्प्राण हो गए ;
    जीते जी पाषाण हो गए !

    आहट पर सुध नहीं होती ;
    मन जैसे कोई जलती अंगीठी !

    तमस में होता द्वार कहीं;
    जीवन का श्रृंगार यही !
    ​सुन्दर शब्द सुजीत जी

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