Hindi poem on Moon
Poetry

चाँद और तुम …..

moon-and-youएक आदत सी इधर से डाली है,
रोज ऊपरी मंजिल पर आ मैं,
पेड़ की झुरमुटों में चाँद देखा करता,
एक दिन पूरा था तुम्हारी तरह,
हजारों सितारों के बीच अलग सा,
वैसी ही उजली सी नहायी हुई,
लपेटे हया का चादर चारों तरफ,
झाँकते हुए बादलों की ओट से !

कुछ दिनों से वो रोज घटता है,
अपना अक्स वो छुपाता है,
जैसे नजरें चुराता रोज ही,
किस्तों किस्तों में दूर जाता हुआ,
तुम्हारी ही तरह आदत है इसकी !

और फिर एक अमावस की रात,
सितारों से सजी सुनी आँगन में,
ना कुछ आहटें है तुम्हारी कहीं,
खो गए हो इस काली रातों में,
शायद उस आसमां की ओट में,
छुपे हो रूठे हुए अपनी आदतों जैसे,
पूनम और अमावस के बीच विरह है,
लेकिन चाँद लौटता है फिर इन सितारों के बीच ;
चाँद और तुम में शायद अब यही फर्क है !

#Sujit

Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky – मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . “यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : – सुजीत भारद्वाज

http://www.sujitkumar.in/

4 thoughts on “चाँद और तुम …..”

  1. और फिर एक अमावस की रात,
    सितारों से सजी सुनी आँगन में,
    ना कुछ आहटें है तुम्हारी कहीं,
    खो गए हो इस काली रातों में,
    शायद उस आसमां की ओट में,
    छुपे हो रूठे हुए अपनी आदतों जैसे,
    पूनम और अमावस के बीच विरह है,
    लेकिन चाँद लौटता है फिर इन सितारों के बीच ;
    चाँद और तुम में शायद अब यही फर्क है
    बहुत सुन्दर शब्दों में महबूब की तुलना चाँद से करी है आपने। और अंतिम पैराग्राफ बहुत ही उत्तम लिखा है !

Comments are closed.