winter mist poem

बहुत ही धुंध हो आई इस बरस..

medium_12956825703बहुत ही धुंध हो आई इस बरस ;
कई रिश्ते धुँधले से हो आये !

बेरुखी भर आयी थी जस्बातों में ;
इसको कभी ना वो समझ ही पाये !

कुछ ऐसी लब्जो की बेबसी थी ;
पसरे ही रह गए खामोशी के साये !

मुश्किल है अनंत संवादों को मिटाना ;
अनगिनत बार मन में लौट के आये !

ना साथ ना सिलसिला ही बनता;
अब हाथ छूटा तो बन बैठे पराये !

बहुत ही धुंध हो आई इस बरस ;
अब वो चेहरे भी धुँधले से हो आये !

#SK … Mist of Winter !!

 

photo credit: Christophe JACROT via photopin cc

2 thoughts on “बहुत ही धुंध हो आई इस बरस..

  1. yogi saraswat

    मुश्किल है अनंत संवादों को मिटाना ;
    अनगिनत बार मन में लौट के आये !

    ना साथ ना सिलसिला ही बनता;
    अब हाथ छूटा तो बन बैठे पराये !
    शानदार अशआर सुजीत जी

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *