winter mist poem
Poetry

बहुत ही धुंध हो आई इस बरस..

medium_12956825703बहुत ही धुंध हो आई इस बरस ;
कई रिश्ते धुँधले से हो आये !

बेरुखी भर आयी थी जस्बातों में ;
इसको कभी ना वो समझ ही पाये !

कुछ ऐसी लब्जो की बेबसी थी ;
पसरे ही रह गए खामोशी के साये !

मुश्किल है अनंत संवादों को मिटाना ;
अनगिनत बार मन में लौट के आये !

ना साथ ना सिलसिला ही बनता;
अब हाथ छूटा तो बन बैठे पराये !

बहुत ही धुंध हो आई इस बरस ;
अब वो चेहरे भी धुँधले से हो आये !

#SK … Mist of Winter !!

 

photo credit: Christophe JACROT via photopin cc

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/

2 thoughts on “बहुत ही धुंध हो आई इस बरस..

  1. मुश्किल है अनंत संवादों को मिटाना ;
    अनगिनत बार मन में लौट के आये !

    ना साथ ना सिलसिला ही बनता;
    अब हाथ छूटा तो बन बैठे पराये !
    शानदार अशआर सुजीत जी

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