Poetry

कब तक यूँ रहता यहाँ ऐसा ही !!

IMAG0161बिखरा बिखरा सा कुछ दिनों से,
बड़ी मुश्किलों से मिलता था ..
यादों का कुछ टुकड़ा !

कागजों पर लिखी कई नज्में,
बिखरे दरख्तों पर दब सी गयी,
पुराने पत्तों का ढेर जम सा गया था !

सब बिखरा बिखरा सा इर्दगिर्द,
धूलों फाँकों में दबी हसरत सी कई,
हाथों को नहीं फिराया ..
मिट जाती कहीं उँगलियों से,
खीचीं तस्वीरें कई आधी अधूरी !

यही वो जगह जहाँ रोज सोचता हूँ तुम्हें;
लिखता हूँ रातों में किस्से सुकूं के !

सोचा किसी दिन आओगे,
तो संवर जायेगी हर बिखरी चीजें,
आज कुछ कोशिश की ..
करीनो से सजा हर सामन को रखा;
हाँ मिट गयी पुरानी लकीरें यादों वाली !

कब तक यूँ रहता यहाँ ऐसा ही,
सजा लिया घरोंदा अपने हाथों से ही !

Poetry – Reformed my Writing Desk with Books, Pen, Diary and Mine thoughts ! #SK

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/