Poetry

कब तक यूँ रहता यहाँ ऐसा ही !!

बिखरा बिखरा सा कुछ दिनों से, बड़ी मुश्किलों से मिलता था .. यादों का कुछ टुकड़ा ! कागजों पर लिखी कई नज्में, बिखरे दरख्तों पर दब सी गयी, पुराने पत्तों का ढेर जम सा गया था ! सब बिखरा बिखरा सा इर्दगिर्द, धूलों फाँकों में दबी हसरत सी कई, हाथों को नहीं फिराया .. मिट […]