बहुत बड़ा रंगमंच है ये जिंदगी !!

black-40963_640

क्या खुद के विश्वास पर भी ..
अविश्वास किया जा सकता !
उहापोह है इस प्रश्न पर ..
अंतर्द्वंद भी बोझ भी !

बहुत बड़ा रंगमंच है;
इस ओर से उस ओर,
कुछ महसूस नहीं होता,
ना जान परता किरदारों
से किरदारों का कोई रिश्ता !

डूब जाता हूँ मुखौटे से लगे चेहरे में,
भूल जाता उसके पीछे के किसी इन्सान को,
नई कहानियों में चला जाता कहीं दूर,
सहसा बदल जाता सब कुछ,
मिलता एक नया मुखौटा ;
कथानक का नया धरातल,
उसमे फिर डूबने को दुबारा,
कोई नहीं जान पाता उस पीछे छुपे चेहरे को,
अपारदर्शी निरंतर बदलते रहते मुखौटे के पीछे,
विवश से चेहरे असंतुष्ट से,
निभाये जा रहे हर किरदार !

शिकायत है उसे कथाकार से,
नहीं बदल सकता इतना चेहरा,
कुछ बनावटी किरदारों से उसे प्यार है,
ख़ुशी मिलती उसे वैसा जी के !

कब पटाक्षेप कभी करतल..
बहुत बड़ा रंगमंच है ये जिंदगी !!

#SK in Night & Pen ………

3 thoughts on “बहुत बड़ा रंगमंच है ये जिंदगी !!

  1. kabira

    well said, nice lines..ख़ुशी मिलती है हमें वैसा जी के…..!

    Reply
  2. Pingback: #SK – 100 Poems in 2014 : Rewind & Revival !! | Sujit Kumar Lucky

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *