इस शहर .. उस शहर !!

इस शहर . . उस शहर,
जिन्दगी होती बसर,
रेत मिट्टी धूलों का रस्ता,
सबकी मुझको है खबर ।

एक मुट्ठी आसमां,
आँखें करती सब बयाँ,
नींद ख्वाब मन को डंसता,
होती मुझको सब फिकर ।

चेहरा चेहरा फिर से ठहरा,
बात बोली नयी नवेली,
लौटी बातें लम्बी रातें,
आँगन में सब बैठा हँसता ,
सबकी मुझको करनी जिकर ।

फिर कुछ कदम कुछ लेके दम,
थोड़ा नम कुछ कम होता गम,
कटता रहता तेज वक़्त बहता,
कौन मेरा अब रह गया रह्गुजर ।

जिंदगी अब रह गयी इस शहर .. उस शहर ।

#SK

1 thought on “इस शहर .. उस शहर !!”

  1. फिर कुछ कदम कुछ लेके दम,
    थोड़ा नम कुछ कम होता गम,
    कटता रहता तेज वक़्त बहता,
    कौन मेरा अब रह गया रह्गुजर ।
    ​बिलकुल ! ​एकदम सटीक और यथार्थ शब्द

Comments are closed.