Poetry

ख़ामोशी का मौसम – Seasons Of Life

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देखो ख़ामोशी का मौसम फिर आया,
थोड़ी मायूसी संग फिर लौट आया ।

बुँदे बिखर कर अब कुछ ना वो बोले,
अब मेरी खामोशी कैसे लब खोले ।

बेरुखी धुप अब निकल कर आयी,
तेरी याद भी बिखर कर ही आयी ।

पतझर में जैसे मन ने उतार दिया हर लिबास,
और धीरे धीरे मन की हर छुट गयी आस ।

झाँके जा के हर आहट पर हो कोई,
फिर ना आये इस मौसम भी कोई ।

सावन बीती मन तो अब शिशिर संग डोली,
सुबह की धुप खिली शाम की ओस हुई रंगीली ।

यादों का मौसम फिर लौट आया,
ख्वाबों का बादल फिर से है छाया ।

देखो ख़ामोशी का मौसम फिर है आया ।

#SK

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/

One thought on “ख़ामोशी का मौसम – Seasons Of Life

  1. झाँके जा के हर आहट पर हो कोई,
    फिर ना आये इस मौसम भी कोई ।

    सावन बीती मन तो अब शिशिर संग डोली,
    सुबह की धुप खिली शाम की ओस हुई रंगीली ।

    ​सुन्दर ​

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