indian summer poem

निर्जन मन …


आजकल का मौसम, दिन भर जलती हुई पछिया हवा, निर्जन सड़के, चिलचिलाती धुप, बेजार मन ! एक कविता इसी संदर्भ में …

indian summer poemसड़कों पर रेगिस्तान उतर आया है,
पछिया बयार का तूफ़ान उतर आया है !

सूखे पत्तों से,
भर गई है गलियाँ और मुंडेरे,
धूलों का आसमान उतर आया है !

परदे आपस में उलझ गए है ऐसे,
जैसे किसी ने गाँठे बांध दी हो,
निर्जन राह और जलता आसमान,
तपती मौसम का पैगाम उतर आया है !

सुख गए है कूप और तालाब,
शुष्क धरा पर शैतान उतर आया है !

कैसे चुपचाप सी खामोश है दुपहरी,
उजड़े मन का कोई मेहमान उतर आया है !

#SK

Post Author: Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज

9 thoughts on “निर्जन मन …

    Ruching sanadhya

    (April 14, 2016 - 3:28 am)

    your writing are awesome ..
    I have almost read every post of yours…

    Ruching sanadhya

    (April 14, 2016 - 3:29 am)

    Your writing really awesome ..
    Every post of your’s

    gyanipandit

    (April 14, 2016 - 10:57 am)

    bahot hi badhiya kavita, keep it up!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

    Sujit Kumar Lucky

    (April 14, 2016 - 3:18 pm)

    Dhanywad utsahvrdhan ke liye !

    Sujit Kumar Lucky

    (April 14, 2016 - 3:20 pm)

    Thank You …

    Sujit Kumar Lucky

    (April 14, 2016 - 3:20 pm)

    Thanks a lot !!

    Amit Shukla

    (April 20, 2016 - 7:39 am)

    एक अदद अंदाज़ में लिखे गए है ये शब्द सारे,
    लगता है मरुस्थल में कोई नई बयार लाया है.

    – अमित शुक्ला

    Sujit Kumar Lucky

    (April 20, 2016 - 9:37 am)

    धन्यवाद !!

    Sujit Kumar Lucky

    (April 20, 2016 - 10:02 am)

    बस सूखे और ग्रीष्म ऋतू के इर्द गिर्द कुछ विचार है !

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