indian summer poem
Poetry

निर्जन मन …


आजकल का मौसम, दिन भर जलती हुई पछिया हवा, निर्जन सड़के, चिलचिलाती धुप, बेजार मन ! एक कविता इसी संदर्भ में …

indian summer poemसड़कों पर रेगिस्तान उतर आया है,
पछिया बयार का तूफ़ान उतर आया है !

सूखे पत्तों से,
भर गई है गलियाँ और मुंडेरे,
धूलों का आसमान उतर आया है !

परदे आपस में उलझ गए है ऐसे,
जैसे किसी ने गाँठे बांध दी हो,
निर्जन राह और जलता आसमान,
तपती मौसम का पैगाम उतर आया है !

सुख गए है कूप और तालाब,
शुष्क धरा पर शैतान उतर आया है !

कैसे चुपचाप सी खामोश है दुपहरी,
उजड़े मन का कोई मेहमान उतर आया है !

#SK

Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky – मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . “यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : – सुजीत भारद्वाज

http://www.sujitkumar.in/

9 thoughts on “निर्जन मन …”

  1. एक अदद अंदाज़ में लिखे गए है ये शब्द सारे,
    लगता है मरुस्थल में कोई नई बयार लाया है.

    – अमित शुक्ला

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