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Summer Leaves Poem

बिखरे पत्ते …

धूप चढ़ती हुई रोज … सूखे पत्ते टूट कर बिखरे बिखरे, जैसे कोई कह गया हो, अलविदा पुराने रिश्तों को । बदलते मौसम के साथ … खो रही नमी भी मन से, अब उजाड़ से तपते दिन होंगे, और होगी मायूसी से ऊँघते दोपहर । दिन ढल रहा है… बिखरे पत्तों को निहारता, टूटे मन […]

indian summer poem

निर्जन मन …

आजकल का मौसम, दिन भर जलती हुई पछिया हवा, निर्जन सड़के, चिलचिलाती धुप, बेजार मन ! एक कविता इसी संदर्भ में … सड़कों पर रेगिस्तान उतर आया है, पछिया बयार का तूफ़ान उतर आया है ! सूखे पत्तों से, भर गई है गलियाँ और मुंडेरे, धूलों का आसमान उतर आया है ! परदे आपस में […]