Night & Pen Poetry

In Search of Orion …

कभी कभी छत की ऊपरी मंजिल पर जाता हूँ, नितांत रात में निहारने आकाश को, इस भागदौड़ में भूल जाता हूँ प्रकृति के इस अजूबे को बचपन से जो नहीं बदला अब तक मैं ढूंढ लेता हूँ डमरू जैसे ओरियन को । जब मास्टर जी ने बताया था तुम्हारे बारे में, बचपन में उस दिन […]

Night & Pen by Sujit
Night & Pen

जिंदगी और किताब – Night & Pen

ऐसे ही बात शुरू हुई जिंदगी और किताब की … सब कुछ कहीं न कहीं सोचा गया होगा, या कोई किताब होगी जिन्दगी की किताब जिसमें लिखा होगा कौन किसके जिन्दगी में कितना अपना किरदार निभाएगा और कैसा किरदार ! ये वक़्त, बातें, सब के अपने पन्ने होते होगे ! पन्ने उलटते ही किसी का किरदार […]

Life & Thoughts
Night & Pen Thoughts

अंतर्द्वंद – Night & Pen

विचारों का जहाँ ठहराव हो जाता ; वहीँ से एक उदगम भी तो है एक नए विचार का ही ! कोई खामोश रहता है, जिक्र नहीं करता, शायद समझा नहीं पाये या समझने वाला आस पास नहीं, खीज कर दो बातों में वो बयान नहीं कर सकता, उसने शब्दों के समंदर को छुपा रखा है […]

words of painting
Night & Pen Poetry

एक चित्र से वार्तालाप …

अब पूरी तरह नहीं ढाला जा सकता शक्ल में ; मन के किसी कोने में अब किसी तस्वीर का धुंधला सा प्रतिविम्ब है जिसने उँगलियों को जैसे बरबस पकड़ के चलाया हो । कुछ उभरी कुछ आकृति कोई चेहरा कौन हो तुम मेरे शब्दों की छुपी कल्पना सी मेल खाती है लेकिन वो तुम नहीं […]

Night & Pen Poetry

Atonement of Words – IN Night & Pen / Inbox Love -8

एकदम रात का सन्नाटा, ध्यान से सुनो, दिन के दबे सिसके बातों की प्रतिध्वनि; कहीं ख्वाब जलने की तो कहीं उम्मीद सुलगने की गूँज ! उस दिन काफी खामोशी के बाद जब उसने कुछ सुना; वक्त की झुंझलाहट शब्दों में उतर गयी उसके; और … बात ; .. शब्दों में टूटे हुए मन को कैसे […]

Night & Pen

गिरह – Knot of Life : #Night & #Pen !

गिरह ऐसी भी नहीं थी की टूट जाती, हाँ कुछ बन्धन जो वक्त, मायूसी, खामोशी के थे ..सब आजाद है अब ! मैं इस इल्जाम का इतना भी हक़दार नहीं हूँ, ना तुम किसी खता के अपराधी ; बस ये ऐसे ही था जिंदगी का फलसफां .. मैं लिखता भी रहा और मिटाता भी रहा […]