sujit hindi poetry on night talk
Poetry

और तब …

sujit hindi poetry on night talkऔर तब
से आगे का किस्सा ?
जहाँ रात को रोक के कल,
हम और तुम कहीं चले गए थे,
उस चाँद को गवाही बनाके,
की फिर इसी वक़्त रोज,
यहीं आ बैठेंगे और पूछेंगे तुमसे,
और तब ?
थोड़ी देर तुम सोचो,
थोड़ी देर मैं भी कुछ,
फिर तुम भी कुछ कहना,
फिर मैं भी सब कुछ कहता,
जब कुछ कहने का मन नहीं होता,
तुम्हें ही सोचते हुए तुमसे कह लेता,
और तब ?
वो चाँद भी ऊब जाता होगा कभी कभी,
रोज वहीँ से वही बात सुनकर,
चाँद भी तो रोज रात संग ऐसे ही बातें करता होगा,
शायद वो भी पूछता होगा “और तब ?” !

 — #Sujit Poetry 
Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky – मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . “यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : – सुजीत भारद्वाज

http://www.sujitkumar.in/