गुस्सा …..

gussa-poemतुम मिलो मुझसे कहीं,
मैं नजरे छुपाऊ,
तुम पूछो कुछ तो,
मैं अनजान हो जाऊ !

तुम मिलो जब,
मैं कहूँ तुमसे,
तुम कौन हो,
तुम क्या लगते मेरे,
और दूर चला जाऊ !

तुम मिलो जब,
पुराना बचा हुआ,
गुस्सा दिखलाऊं,
तुम अब मत मनाओ,
न मैं फिर मान जाऊ !

तुम कभी मत आओ,
ये गुस्सा है मेरा,
घुटने तो तपने दो,
संवेदना के गुनाह में,
हरपल तपता रह जाऊ !

#SK

4 thoughts on “गुस्सा …..”

  1. सर आपकी कविता बहोत अच्छी लगी, कई लोग इस गुस्से की वजह से अपना सब कुछ गवा चुके हैं.

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