Poetry

रात के नभ चल तारों को देखा !

कई रातें लंबी बीती थी सदियों जैसी,
ऐसी तंग गलियों में युग सा था चाँद को देखा,
याद हमें एक आती है जब साँझ पसरते ..
उमस सी सावन होती थी..सब होते थे छत पर,
तब माँ चुपके से आती थी, और वो दूर हमें दिखाती थी !
सात तारों को संग लेके वो एक तारा दिखलाती थी !
सदियाँ बीती हर बातों की ..
अब लम्हों को बस उलझते देखा !
एक रोज दूर परे, भटके से निकले..
कुछ सायों को संग चलते देखा !
उमस पर कुछ सावन भी बरसी,
साँझ को रात ओढ़ के हरषी !
तब फिर,
सदियों परे रात के नभ चल तारों को देखा ,
सात सहेली को फिर संग मिलते देखा !
Sujit
Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/