Poetry

कुँआ ….!


खाई खोद रहा वो इंसान जो कुछ पाना चाहता !
आत्मविश्वास जैसे पानी मिल ही जायेगा !
लक्ष्य तो मिलेगा ही ! आते जाते लोग कह ही देते,
 खाई है खाई ..
खोद रहे .. लोगों के लिये इक मुश्किल ही बना रहा !
 यही जिंदगी का नजरियाँ है,
सफलता का मार्ग चुनौतियां से भरा,
 सफलता की बिना सारा प्रयत्न आपके लिये मायने रखता हो,
पर आपकी समीक्षा करने वाले लोगों के लिये ये इक उपहास और विफलता का पर्याय ही है !
आज कल, सितारों को बदलने की बाट जोहने से क्या,
और लक्ष्य में व्यतीत क्षणों का क्या ~
ये आपके मन की इक चेतना है जिसे उस क्षण तक जीवित रखे
जब तक सफलता आपके कदमों का दास नहीं होती !
अब आते जाते लोग उस जगह को कुँआ कहते,
राहगीर प्यास बुझाते जो वर्षों बिताए गये तृष्णा से कितना परे है !
सत्य है जीवन सही दिशा में नहीं .. पर सोचने के लिये वक्त भी नहीँ !  

SK

Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky – मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . “यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : – सुजीत भारद्वाज

http://www.sujitkumar.in/