कुँआ ….!


खाई खोद रहा वो इंसान जो कुछ पाना चाहता !
आत्मविश्वास जैसे पानी मिल ही जायेगा !
लक्ष्य तो मिलेगा ही ! आते जाते लोग कह ही देते,
 खाई है खाई ..
खोद रहे .. लोगों के लिये इक मुश्किल ही बना रहा !
 यही जिंदगी का नजरियाँ है,
सफलता का मार्ग चुनौतियां से भरा,
 सफलता की बिना सारा प्रयत्न आपके लिये मायने रखता हो,
पर आपकी समीक्षा करने वाले लोगों के लिये ये इक उपहास और विफलता का पर्याय ही है !
आज कल, सितारों को बदलने की बाट जोहने से क्या,
और लक्ष्य में व्यतीत क्षणों का क्या ~
ये आपके मन की इक चेतना है जिसे उस क्षण तक जीवित रखे
जब तक सफलता आपके कदमों का दास नहीं होती !
अब आते जाते लोग उस जगह को कुँआ कहते,
राहगीर प्यास बुझाते जो वर्षों बिताए गये तृष्णा से कितना परे है !
सत्य है जीवन सही दिशा में नहीं .. पर सोचने के लिये वक्त भी नहीँ !  

SK