Poetry

एक अनजान सफ़र


भागती ऊहापोह जिन्दगी में
क्या खोने पाने की चाहत है,

बस उबते थकते मन को बहलाते

चले जा रहे एक अनजान सफ़र पर !

क्या पाउगा या क्या खो दूगा,
गुमनाम चाहत है एक हसरत है,
सपनो की बादल की एक बूंद ही सही
बस चले जा रहे एक अंजन सफ़र पर


रचना : सुजीत कुमार लक्की


Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/

3 thoughts on “एक अनजान सफ़र

  1. क्या पाउगा या क्या खो दूगा,
    गुमनाम चाहत है एक हसरत है.

    अच्छा लगा. आगे लिखते रहें.

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