अभी कुछ बाकी है

poem of due lifeरास्ते भले ही बदले हमने पर हम भी किसी मंजिल के राही है ,
उबर खाबर पगडंडियो पर जरुर फिसले हमारे पावं
पर चलने की ललक आज भी बाकी है !

वक़्त की भागदौर में रुकता गया कारवां
पर सपनो की भवर से निकलना आज भी बाकी है !
रुकी थकी यादों में डूबा जरुर में पर उन पर
लहरोंकाउठानाआजभीबाकीहै !
थके थके से हो कदम मेरे लगते
पर मन में कसक अभी बाकी है … बाकी है ! ! !

रचना : सुजीत कुमार लक्की
 

 

Post Author: Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज

3 thoughts on “अभी कुछ बाकी है

    सुलभ सतरंगी

    (August 31, 2009 - 4:26 am)

    अभी कुछ बाकी है…
    ये सफ़र अपना सा लगा.

    Anonymous

    (December 23, 2009 - 4:50 am)

    really its arue fact yar

    abhishek

    (November 8, 2010 - 4:04 am)

    kafi sunder rachna ..

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