Village ice cream vendor

बर्फ वाला

बचपन में गाँव में याद है – विनिमय प्रणाली से हम बर्फ के गोले, खिलौने खरीदते थे ! आज के बच्चे “चाइल्ड डेबिट कार्ड” से आइसक्रीम खरीद लेते या मोबाइल एप्प से भी शॉपिंग ! एक कविता गाँव की उस तस्वीर को शब्द में कैद करके रख देता हूँ ; शायद गुम होती उन बातों को कभी कोई पलटेगा बीते यादों के बहाने !
Village ice cream vendor
डुग डुग करके साइकिल पर कोई आया ;
पीछे काठ के बक्से लिये बर्फ बेचने आया !

दूर सड़क पर जब वो दिखा सब बच्चों ने आवाज लगाया ;
बड़की चाची को देख सबने अपना मासूम चेहरा बनाया !

बड़की दीदी छोटी गुड़िया छोटा मुन्नू गोलू ;
खुद को जोड़ सब आठ थे गिनती का अंदाजा लगाया !

पच्चीस पैसे का नारंगी वाला पचास पैसे का दूध वाला ;
ये उस बर्फ वाले ने झट से अपना दाम हमें सुनाया !

चाची बोली पैसे नहीं आटा गेंहू मकई के बदले लो ;
मैं दौड़ के झट से बड़ा सा कटोरा ले आया !

खाट पर बैठी दादी बोली एक कटोरी ही देना उसमे ही सब लेना ;
कटोरा पूरा भर के लाओ बर्फ वाले ने वापस हमें लौटाया !

थोड़ी खींचातानी कर बर्फ वाले को किसी तरह मनाया ;
एक कटोरा मकई देके बर्फ सबने मिल के खाया !

गाँव की दुपहर सुनी पगडंडी बर्फ का बक्सा ;
चित्र ऐसा की मन मेरा यादों से भर आया !

– सुजीत

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