colors of life in words
Poetry

कौन सा रंग ….

colors of life in wordsकिस रंग तुझे ढूँढू ,
कौन सा रंग लगाऊँ !

जिस रंग सखा तुम खोये ;
उस रंग को कैसे मिटाऊँ !

तू जो फिर लौटे तो ;
हर रंग में मैं रँग ही जाऊं !

तुझ बिन कहीं चैन नहीं था ;
तुम बिन बेरंग पल ही बिताऊँ !

मौन रंग में कभी मैं चाहूँ ;
फिर शब्दों के रंग सजाऊँ !

विगत स्मृति के चिन्हों से ;
यादों के रंग भर के लाऊँ !

मैंने तो हर रंग उकेरे ;
तुम बस श्वेत श्याम ले आये !

कुछ और रंग तुम भी लाते ;
थे आस जो मेरे मन में समायें !

मेरे नजरों ने थे हर रंग समेटे ;
अब क्यों सब बेरंग नजर से आये !

सुर्ख़ रंग हो वहाँ भी हरदम ;
यहाँ भी रंग रंग मैं तर हो जाऊँ !

सुबह संग कभी शाम रंग ;
मैं तो जीवन के चित्र बनाऊँ !

~ सुजीत

Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky – मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . “यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : – सुजीत भारद्वाज

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