fbpx
early morning poem

पौ फट रही …

बारिश के बाद सुबह की धुप को महसूस कीजये, पेड़ों के बीच से निकलती धुप की किरणें, मन को एक सुकून देती, एक असीम ऊर्जा लेके आती रोज नई सुबह ! एक लघु कविता इस संदर्भ में … पौ फट रही ; पेड़ों की ओट से निकलती हुई, झुरमुटों में हो रही उजली पीली रौशनी […]

मंदिर के सीढियों पर …

बीते रात के ख्वाब को एक दिन, मंदिर के सीढियों पर देखा । माथे पर कुमकुम का टीका, थाल अरहुल थे सब सजे । बीते रात के ख्वाब को, सीढियों पर धीरे धीरे जाते, ख्वाब को ओझल होते देखा । मेरा अर्चन ही क्या था, वहाँ जैसे निश्छल सादगी को देखा । तम था मिट […]

एक सुबह कुछ ऐसे .. ! Bird, Butterfly & Morning

चाँद की पंखुरियाँ सिमट गयी,हरी पत्तियां और कोपले,निकले अपने खोले आँखे,देखो छोटे छोटे चिड़यों के बच्चे,उनके कलरव तुझसे ही मिलते है,आके जरा देखो तो उन्हें,जो आ गयी है तेरी मुंडेरों पर ! सीढ़ियों से उतरते एक सुबह,एक अहसास में कमी सी लगी,शायद तेरे पेरों में आज पायल नही थे,ये आँगन तो राह बिछाये थे,हर सुबह […]