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Unmet Friend – Love in December !

जहाँ कोई संवाद नहीं है वहाँ कौन सी संवेदना है जो जोड़ती है दो अनजान कृत्रिम आयाम में दो शख्सों को ! एक दिन अखबार में पढ़ा दूर दूर सुदूर ग्रहों पर हम नहीं जा सकते क्योंकि जाने में 200 – 300 साल और उतनी हमारे पास सांसें नहीं ! पर जाने की रफ्तार प्रकाश […]

inbox love in December

Love in December – इनबॉक्स लव ~13

दिसम्बर, धुंध, सिमटी रातें … दिसम्बर की कुछ यादें ! जल्दी जल्दी शाम का ढल जाना ; हाँ हर बदलता मौसम यादों को भी तो बदल देता ; ये शीत में धुलती रातें, सुने से सड़कों पर धुंधली पड़ती रौशनी ! किसी साल से इसी मौसम की कुछ बातें याद है ? जैसे खुद से […]

शीत की आँगन !

सर्द हवाओं ने ये महसूस कराया; फ़िक्र लौट आयी थी उनकी आज ! फिर कुछ सरसरी हवा छु गयी होगी, फिर अब बचपन लौट गयी होगी ! ना मानी होगी बात फिर किसीकी, हो आये होंगे गलियों में यूँ ही ! कुछ शरारतें कुछ बेबाक सा मन, भागती फिरती चहकती शीत की आँगन ! आ […]

आहट सी हुई …

स्पंदन मात्र भी नहीं था चेहरों पर, विस्मित ना हुए नयन भी थोड़े भी, बड़ी ही क्षणिक अनुभूति सी थी.. जैसे पथराये से आँखों को छु गयी, एक झलक सहलाती हुई दूर जाती ! जैसे भिगों गयी ओस की दो बूंद, धरा की कोमल घासों को चूमती हुई ! जैसे दो शब्द में छुपे थे […]