Poetry

Shades On Words

आते आते रह जाती,
अब जो भी यादें है !

धुँधला धुँधला तो नहीं,
क्षणिक स्मरण होता शब्दों से,
और पर जाती फिर धुल की,
अनगिनत परते उनपर !

शिकायतें भी उभर जाती,
कुछ नजरों में विस्मृत भी,
क्या जान पाए वो हमें ,
या कितना बतला पायें हम !

सवाल पर विराम सा आ टिकता,
कितना कठिन, या कितना भीड़ भरा,
अब हर रास्तों पर कुछ ऐसा ही लगता,
चलो सफर कर बस उस मोड़ तक,
फिर सुकून में उस पथ से बतायें,
मेरे यादों में क्या क्या बसता ..!

न मोड़ न कोई रस्ता …
बंजर हुए यादों पर,
मेरा मन भी मुझ पर ही हँसता !

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/