Night Moon & You Hindi Poem

रात और चाँद …

ये कैसी शरारत करते हो,
रात तारों के साथ ऊँघने छोड़ जाते हो,
तेरे जाने के बाद एक तारा,
पास आ बैठता,
कन्धों पर हाथ रख,
पूछता है तुम्हारी कहानी,
मैं उससे झूठ कहता की,
तुम एक दिन आने को कह गए हो,
उसकी हँसी चिढ़ाती है मुझे,
जैसे उसने बात न मानी हो मेरी !

किसी रोज आके दो घड़ी,
पास तो बैठो,
हाँ रात घनी हो बिना बादलों वाली,
उस तारे को दिखाना है मुझे,
जड़ना है उसके मुँह में ताला,
उसको पता चले जमीं पर चाँद होता है ।

ये कैसी शरारत करते हो;
रात तारों के साथ ऊँघने छोड़ जाते हो !

#सुजीत 

8 thoughts on “रात और चाँद …”

  1. बहोत ही बढ़िया कविता खास कर
    “किसी रोज आके दो घड़ी,
    पास तो बैठो,
    हाँ रात घनी हो बिना बादलों वाली,
    उस तारे को दिखाना है मुझे,
    जड़ना है उसके मुँह में ताला,
    उसको पता चले जमीं पर चाँद होता है ।”
    ये पंक्तिया अच्छी लगी

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