new love hindi poem
Poetry

इश्क़ ही है ..

new love hindi poem
वो जो रातों को अधजगा सा रखता,
अजनबी संग देखो सब भेद है कहता,
यूँ ही मन ही मन कुछ गुनगुनाता है रहता !

ये जो कुछ कुछ अपना सा लगने लगा है,
ये देखो कौन अब कुछ नया चुनने लगा है,
खुद से मन जो कुछ अब कहने लगा है !

हाथों की लकीरों का ये खेल सा लगता,
या बरसों का छुपा कुछ भेद सा लगता,
या रिश्तों की नई डोर का संयोग सा लगता !

वो जो रातों को जो अधजगा सा रखता,
शायद आधा अधूरा सा सही इश्क़ ही है !

#SK
Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/

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