रात चीखती धरी रह गयी

night-murder-poemभला उस गली में क्या खुदा बसेगा ;
जहाँ सब हाथ रंगे हो खूनों से !

मिट्टी भी रंगीन हो गयी ;
सबके काले करतूतों से !

जब रात चीखती धरी रह गयी ;
तब ख़ामोशी निकली कोनों से !

सना रक्त सा तेरा हाथ हुआ ;
अब इंसान गया तेरे सीने से !

साँसें किसकी छूटी तू क्या गिनता ;
तू मर गया अपनी सांसों को लेने से !

खुद की ही तूं लाश ढो रहा,
अब लतपथ हो पसीने से !

#Sujit (वर्तमान परिदृश्य से जुड़ी एक रचना )

4 thoughts on “रात चीखती धरी रह गयी

  1. arun

    sir i am alos writer and i like your creations i want to talk you sir. can u call me sir my number is 9417531191

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