रात चीखती धरी रह गयी

night-murder-poemभला उस गली में क्या खुदा बसेगा ;
जहाँ सब हाथ रंगे हो खूनों से !

मिट्टी भी रंगीन हो गयी ;
सबके काले करतूतों से !

जब रात चीखती धरी रह गयी ;
तब ख़ामोशी निकली कोनों से !

सना रक्त सा तेरा हाथ हुआ ;
अब इंसान गया तेरे सीने से !

साँसें किसकी छूटी तू क्या गिनता ;
तू मर गया अपनी सांसों को लेने से !

खुद की ही तूं लाश ढो रहा,
अब लतपथ हो पसीने से !

#Sujit (वर्तमान परिदृश्य से जुड़ी एक रचना )

Post Author: Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज

4 thoughts on “रात चीखती धरी रह गयी

    gyanipandit

    (October 6, 2015 - 1:41 pm)

    Your poem is very fine .i most like.

    arun

    (October 20, 2015 - 7:38 am)

    sir i am alos writer and i like your creations i want to talk you sir. can u call me sir my number is 9417531191

    संजय भास्कर

    (October 28, 2015 - 8:42 am)

    आपकी भावनायें एकदम नि:शब्द कर गयीं

    Sujit Kumar Lucky

    (October 29, 2015 - 6:19 pm)

    शुक्रिया !!

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