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भीड़ और मौत के सन्नाटे के बीच ..

एक सविंधान के  रक्षक को भीड़ इसलिए मार देती की वो अपने कर्तव्य को निभा रहा था, भीड़ और मौत के सन्नाटे के बीच न कुछ सवाल है न जवाब , न पक्ष है न विपक्ष बस है तो मौत का सन्नाटा ! कौन है हत्यारा ये समाज जिसके मन में विष ही विष है नफरत का […]

रात चीखती धरी रह गयी

भला उस गली में क्या खुदा बसेगा ; जहाँ सब हाथ रंगे हो खूनों से ! मिट्टी भी रंगीन हो गयी ; सबके काले करतूतों से ! जब रात चीखती धरी रह गयी ; तब ख़ामोशी निकली कोनों से ! सना रक्त सा तेरा हाथ हुआ ; अब इंसान गया तेरे सीने से ! साँसें […]