Poetry

दो कदम चल टूट जाता ..

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ये सब्र ही है है जो दो कदम चल टूट जाता;
पूछता नहीं तुमसे क्या साजिशे किसकी !

हर रिश्ता कैसा जाना अनजाना छुट जाता;
सोचता नहीं अब क्या दोहमते किसकी !

समझा नहीं मैं खुश हो कैसे तू रूठ जाता;
वो क्या कहा था जो, थी ख्वाहिशें किसकी !

क्या कीमती ख्वाब था जो हर रात लुट जाता;
शिकायतें नहीं अब, खुद से नहीं उम्मीदें किसकी !

यूँ तो ताल्लुक भी .. और हक भी नहीं ;
पत्तों से भरा पेड़ भी कभी कभी सुख जाता !

ये सब्र ही है है जो दो कदम चल टूट जाता…

#SK ~ Sometime Life as a Dry Tree !!

Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky – मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . “यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : – सुजीत भारद्वाज

http://www.sujitkumar.in/