Poetry

जिंदगी तू भी अब तो साथ दे थोड़ा !!

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मैं अपनी हर रीत निभा रहा ..
जिंदगी तू भी अब साथ दे थोड़ा !

मैं हर सुबह चहक उठता;
पर तू शाम तलक मायूस कर देता !

चलो छोड़ चला लड़कपन,
रूठने मनाने का !

चलो दूर हुआ बचपन,
हर पल मुस्कुराने का !

चलो गिरवी रखा रात के ख्वाबों को,
कुछ तो अब तू भी लौटा जरा !

सोच लिया छोड़ने की हर चीजे,
कुछ पाने की राह दिखा जरा !

वक्त सिमट कर दोहमत लगा रहा,
जिंदगी तू भी अब तो साथ दे थोड़ा !

:- सुजीत 

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/

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