Love Two Liners Poetry By Sujit
Poetry Two Liners

इश्क़ – 4

इश्क़ के कुछ रंग ऐसे भी ..

इस आदतन ख़ामोशी की वजह इतनी है, तुझे कुछ कहके दिल अपना दुखा लेता ।
#यूँही #Ishq

बस चिट्ठियों को मिले मुक्कमल पता, लिखने से कब गुरेज रखा किसने !

तेरी यादों के साथ जो सुबह हुई,
उसमें उजाले बहुत है … #इश्क

बेवजह जो हरपल फ़िक्र करता मेरी, सबसे मैंने उसका ताल्लुक छुपाया है ! #इश्क़

जैसे रोशनदानों में जगह धुप की किरण ढूंढ लेती है,

वैसे ही हर सुबह उसकी हँसी मेरा पता ढूंढ लेती है ।। #इश्क़

जलन होती है उसे मेरे शब्दों को कोई पढ़े,
अब उसे नज्म में ढलने की चाहत सी हुई है ।
#इश्क़

अब उसे रुठने और मनाने का तरीका आया,
अब उसको प्यार करने का सलीका आया !

#इश्क़

कभी जिद तो कभी ख़ामोशी में रहती, शायद इश्क़ ऐसे ही संवरती .. #इश्क़

रात पर सोयी नहीं, लाल है उसकी आँखें, नया इश्क़ है लगता ।
#इश्क़

रूठ कर वो पत्थर सा हो जाता, इश्क़ है पिघल कर मोम भी होगा !
#इश्क़

उसने नकारा कई दफा .. इश्क़ नहीं मुझे ;
कुछ इश्क़ जैसा था,
जो उसके चेहरे पर नजर आया था ।

#twoliners #love

समझेगा वो जिंदगी के जिरह भी, अगर उसे इश्क़ होगा तो … #इश्क़

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/