Love Two Liners Poetry By Sujit
Poetry Two Liners

इश्क़ – 3

इश्क़ के कुछ रंग ऐसे भी ..

रूठ के कुछ दूर है जाता, जो इश्क़ न होता तो, वो न लौट के आता ! #इश्क़

उसे मनाना नहीं आता, मुझे मनाने की कोशिश में, वो खुद ही रूठ जाता ।
#इश्क़

मेरी नजर पड़ी …
उसकी नजर झुक गयी,
मेरी नजर पड़ी … वो हया में सिमट गयी !
#इश्क़

तुम्हारी ख़ामोशी भी कितनी खूबसूरत है, घन्टों मुझसे बातें है करती !! 💞#इश्क़

वक़्त बेवक्त रूठ जाता, इश्क़ है उसे, वजह यही काफी है ।

#इश्क़

वो खफा है मुझसे उसके बातों में झलकता, उसे इश्क़ है ये उसके आँखों से छलकता !
#इश्क़

मैंने छुपाते देखा उसको अपनी नाराजगी,
इश्क़ वो ऐसे करेगा मैंने कभी सोचा न था !

#इश्क़

वो रोया मेरी बातों से,
उसकी आँखों से जो बहा वो इश्क़ था …. #इश्क़

हमने देखी उनकी आँखों में हया,
इश्क़ यूँ ही तो नहीं हुआ मुझे । #इश्क़

हर दफा जाते हुए तेरा पीछे मुड़ के नहीं देखना,
इश्क़ का ये भेद मुझे तुमसे है एक दिन पूछना !

#इश्क़

न जाने बातों की लत कब लगी, इश्क़ की ये आदत भी अजीब है ।
#इश्क़

तेरी थोड़ी सी हँसी ये वहम तोड़ती है,
तुम रूठ कर अब हमसे कुछ कहते
नहीं । #इश्क़

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/