Love Two Liners Poetry By Sujit
Poetry Two Liners

इश्क़ – 2

इश्क़ के कुछ रंग ऐसे भी ..

आओ रूठे से चेहरे को मनायें, इश्क़ है तो वो गिला भी करेगा । #इश्क़

इश्क़ आँखों से कैसे छलके,
पेशानी पर शिकन की दरारों में,
ये कहीं गुम सी हो जाती ! !
#इश्क़

मेरे सफर की उलझनों में तुम साथ हो,
मेरे कदम को अब क्या मुश्किलें रोकेंगी ।। #इश्क़

अलसायी सी शीत की सुबह का सुकून,
और तेरा इश्क़ दोनों एक से है ।
#इश्क़

तेरी उलझी लटों को सुलझाना, मसरूफ़ रहने के ये कुछ नए बहाने है । #इश्क़

हवायें जो आके तेरे झुल्फों को बिखेरती, अब हाथों से उन हवाओं का रस्ता रोकते है । #इश्क़

रोज तुझे नये नजरों से देखते,
रोज ही इश्क़ नया सा होता । #इश्क़

तेरे चेहरे पर इश्क़ का रंग यूँ निखर आया, ओस की धुंधली सुबह भी सिंदूरी हो गयी ।  #इश्क़

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
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