Poetry

अधुरा अलविदा ….

lights-need-postcards-far-away-snow-sometimes-Favim.com-466902अलविदा अधुरा ना होता वो,
जो तेरे जिक्र में मैं ना नजर आता ।

फिर ना फिक्र उमड़ती मुझमें,
जो तु अधुरा ना नजर आता ।

बेफिक्र ही गुजर जाता दूर मैं,
जो रास्तों में तू ना नजर आता ।

मुस्कुरा कर रह लेता अपने गमों में,
जो तेरे आँखों में कोई गम ना नजर आता ।

तेरी ख़ामोशी ही मेरी नाराजगी रह गयी हमेशा,
मैं देखता रहा और तुझे ही कुछ नजर ना आता ।

अगर कह दिया अलविदा तो ये मुक्कमल होता,
ना दूर गये तुम कहीं और ना ही पास कुछ नजर आता ।

ये आखिरी अलविदा भी अधुरा ही रह गया,
बिखरा सिमटा मैं ऐसा ही बस अब नजर आता ।

सुजीत

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/

One thought on “अधुरा अलविदा ….

  1. तेरी ख़ामोशी ही मेरी नाराजगी रह गयी हमेशा,
    मैं देखता रहा और तुझे ही कुछ नजर ना आता ।

    अगर कह दिया अलविदा तो ये मुक्कमल होता,
    ना दूर गये तुम कहीं और ना ही पास कुछ नजर आता ।
    ​बहुत सुन्दर

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