old body poetry

पुराना जिस्म ..

old body poetryनये नये कपड़ों में लिपटकर चला आता ;
वही पुराना जिस्म फिर से संवर जाता ।

उतार कर हर तकलीफे वो इस तरफ आता;
कुछ पल की उम्मीदें अपने साथ ले जाता ।

कुछ बदल कर चेहरों की सिलवटें ;
हाथों की लकीरें मिटा कर आता ।

कल क्या हो पल में सब बिखर जाता ;
कोई खफा है कोई नजर चुरा जाता ।

कोशिश करता लौट कर आने की ;
क्या सोच कर कोई वहीं ठिठक जाता ।

मन बोझिल भी हो वो रोज समेट आता;
वही पुराना जिस्म फिर से संवर जाता ।

#SK

 

photo credit: seyed mostafa zamani via photopin cc