old body poetry
Poetry

पुराना जिस्म ..

old body poetryनये नये कपड़ों में लिपटकर चला आता ;
वही पुराना जिस्म फिर से संवर जाता ।

उतार कर हर तकलीफे वो इस तरफ आता;
कुछ पल की उम्मीदें अपने साथ ले जाता ।

कुछ बदल कर चेहरों की सिलवटें ;
हाथों की लकीरें मिटा कर आता ।

कल क्या हो पल में सब बिखर जाता ;
कोई खफा है कोई नजर चुरा जाता ।

कोशिश करता लौट कर आने की ;
क्या सोच कर कोई वहीं ठिठक जाता ।

मन बोझिल भी हो वो रोज समेट आता;
वही पुराना जिस्म फिर से संवर जाता ।

#SK

 

photo credit: seyed mostafa zamani via photopin cc

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/