eastern wind bihar poem

ये पुरवा हवा..

eastern wind bihar poemये पुरवा हवा..

काश इसे कैनवास पर उतारा जा सकता;
शब्दों में बांधा जा सकता;
या किसी संगीत में इसे समाया जा सकता;
अपने संवेग से अल्हड़ बन ये बहता ;
छत की मुंडेरों से टकराकर इठलाता ;
चिड़ियों के संग संग उड़ता जाता ;
पेड़ों के संग बाहें डाल झूल जाता ;
नदी के तीर पर बहता बलखाता ;
गेहूँ की सुखी बालियों को छूता सहलाता ;
गलियों में आवारा बन धूल उड़ाता ;
अहसास बन कर ये मन को है तर कर जाता !

#Sujit

 

One thought on “ये पुरवा हवा..

  1. gyanipandit

    बेहतरीन पोस्ट ! मैंने तो इस पोस्ट को बुकमार्क ही कर दिया . धन्यवाद

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