Poetry

लौट के यादें शहर को आई – Autumn Back To The City

{महानगर बसेरा है आगंतुक प्रवासी अनेकों लोगो को – छुट्टियों में घर को लौटना फिर महानगर की भीड़ में शामिल होना; कुछ जो अभ्यस्त है आने जाने की प्रक्रिया से कुछ नये संगी साथी पहली बार घर जाते ; इसी लौटने और पुनः जीवन की आपाधापी में खोने की एक कविता – सुजीत }

रस्ते पर फिर भीड़ हो आई,
छुट्टियों से लौट के यादें शहर को आई ।autumn-back-fall-late-autumn-lonely-man-Favim.com-67059

बीत गया सावन अब तो ;
सर्दी की सुबह की ठंडी हवा खिड़की पर हो आई ।

हो गयी फिर भीड़ में शामिल ये कदमें,
जिन्दगी जीने से फिर वाकिफ हो आई ।

उसे तजुर्बा कम था लौटने का,
यादें उसके संग ही लौट कर आई ।

रंग ढंग सीख लेगा कुछ वक़्त हो जाने दो,
खुद में सिमटने का हुनर अब उसमें हो आई ।

ये मौसम लौटा है ख्वाबों को लेकर,
उसकी आँखों में एक खुशी सी नजर है आई ।

इस तरह छुट्टियों से लौट के यादें शहर को आई ।

#SK

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
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