Monthly Archives: January 2015

सियासत ए राजधानी …

दिल्ली जहाँ सियासत कभी खत्म नहीं होती ! हर सुबह कई वादों की सौगात लेके आती ; तो शाम बिखरे वादों पर कहकहे लगाती ढल जाती ! राजनीती शास्त्र भी है शस्त्र भी उपयोगिता पर निर्भर है !!

विरोध तो स्वरुप है चिंतन का ही ; और एक प्रगतिशील चिंतन के लिए आवश्यक है विरोध ! पर विरोध का स्वरुप निकृष्ट ना हो ये हमारे विवेक पर आश्रित है ! तकनीक की उपयोगिता ने हमे सक्षम बनाया है की हम तर्क कर सके ; अपने विचार रख सके ; पर इसी परिचर्चा में कुछ विवेकहीनता भी उजागर हुई है ।

चुनाव अवसर है विवेकपूर्ण निर्णय लेने का जनमानस के लिए तो जन प्रतिनिधियों के लिए ये चुनौती कम जिम्मेदारी ज्यादा है ! कर्तव्य निर्वाह से लेकर पद लोलुपता सब इसी राजयोग का हिस्सा हैं ! निष्ठा और नीति स्वनिर्मित होती ये किसी शास्त्र में विदित अध्याय नहीं जो अर्जित की जा सके !

जनमत को कैसे परिभाषित करेंगे हम “ये तो ना भगवा है ना खादी है ; ये ना ही टोपी है ना तो लँगोटी है ” ये तो कभी भूख है तो कभी रोटी है !

सन्दर्भ की ओर रुख करे.. फिर सियासते ए राजधानी में महापर्व आयोजित है ! ” फिर कुछ वादे है जो पिछली दफा आधे थे फिर से उसको सब साधे है ” !

जनसभा तो होती ही है प्रायोजित आयोजित होती ही आ रही ; पर एक जनआंदोलन कहीं अपना अस्तित्व खो गया इन घटनाचक्र में खोकर कहीं दम तोड़ गया ! कुछ पुरानी स्मृति में लौटे तो शायद ही कुछ दशकों में जनमानस आंदोलित हुआ होगा ! आजादी की ख़ुशी खुमारी में वक़्त बीतता गया सरकारें आती जाती रही, नालें पुल सड़क बनते रहे बिगड़ते रहे ! और फिर दशकों दशकों के सफर में तंत्र में विकृतियाँ भी समाहित हुई । और एक चरम पर आके परम्परागत राजनीति ने इसका दुरूपयोग भी भरपूर किया और लोगों की उम्मीदें पीछे छूटती चली गयी ; खुद अपने चुने हुए प्रतिनिधियों से अपेक्षा रखके जनता बार बार उपेक्षित होती रही !

आम नगरी/शहरी नागरिक से लेकर गाँव की सरल साधन विहीन जनता भी अपने जीवनस्तर में आये ठहराव से कहीं ना कहीं असंतुष्ट था ; जो भी उम्मीदें इस तंत्र से उसको थी उसमें ठहराव आ गया था ! और ऐसी ही कई चीजों की दबी मायूसी को एक चिंगारी चाहिए था ; चिंगारी था “लोकपाल” भ्रष्टाचार मुक्त भारत का नारा ; केवल लोग भ्रष्टाचार ही नहीं अपनी सभी मायूसी को इस जनांदोलन से जोड़ के देखने लगे ; गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी, विकास, स्वास्थ्य सभी मुद्दों से हतोत्साहित लोगों को व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने का एक मंच मिला और एक सिरा जिसे पकड़कर दूर जाया जा सकता था ! विरोध का ऐसा मंजर शायद ही दशको से किसी ने देखा होगा उच्च पदाधिकारी से लेकर इस तंत्र को चलाने वाले लोग भी अपनी भागीदारी दे रहे थे ; शिक्षक, कलाकार, क्षात्र, गरीब, अमीर, अभिनेता सब विरोध के इस मंच से इस कदर जुड़ते गए की जनसैलाब ने इस लोकतंत्र से सवाल कर दिया की हम जिसे चुने वो काम नहीं करे तो क्या करे ? क्यों हमे हक़ नहीं मिलता ? हमारा देश का विकास क्यों अवरुद्ध है ? हमारे देश का युवा क्यों बेरोजगार है ! शायद कभी ही ऐसा हुआ था की लोग अपने रोजगार और उद्यम को छोड़ डट गए थे लोकपाल आंदोलन से ! व्यक्ति का जुड़ाव अपने आप में एक आंदोलन के लिए व्यापक था !

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घटनाक्रम बदला फिर आंदोलन में सलग्न एवं कथित जनक कार्यकर्ताओं ने इस सिद्धांत पर चलने का निश्चय किया की – “राजनीति को सही करने के लिए इसमें भाग लेना होगा” एक अलग राजनीति सबके सहयोग और सहभागिता की राजनीति ; शिक्षित वर्ग की राजनीति ; मुद्दों की राजनीति ! कदम सार्थक था ; जनसैलाब को आशा की किरण दिखाई पड़ी की जब विगत वर्षों से परम्परागत राजनीती से कुछ नहीं मिला तो एक बार ये कदम भी सही ! इस तरह जन आंदोलन का राजनैतिक पदार्पण होता और आरम्भ होती नई राजनीति की नई परिपाटी ! क्या कदम ये सार्थक था ? मत विभिन्न हो सकते पर एक युवा और शिक्षित वर्ग ने जरूर इसे सार्थक माना !

बस “राजनीती शास्त्र भी है शस्त्र भी उपयोगिता पर निर्भर है ” और सियासत के मंच पर इतने घटनाक्रम आते रहे की उस जनआंदोलन का जो स्वरुप था अब वो धूमिल सा हो रहा ! कहीं चूक हुई ? क्या हुआ आखिर ऐसा ? स्वतंत्र समीक्षा की जा सकती है आइये करे – बड़े कार्य को संपादित करने के लिए छोटे छोटे चीजों से पहल की शुरुवात हो सकती ; यूँ ही फसल तो खेतों में नहीं उगती ; जुताई, बुआई से लेकर किसान कितने मेहनत करता ; अगर देश के राजनैतिक बंजर हो चुकी थी हम बंजर बेजार का रोना एक बार रो सकते लेकिन अगले दिन से उसे जोतने कोड़ने का तो काम शुरू ही करना होगा ; अगर हम दूसरे किसान के जमीन का रोना रोये की मुझे बंजर जमीं मिली ; तो अंततः हासिल कुछ नहीं मिलता ! आरोप प्रत्यारोप और अपनी अभिलाषा के बीच का असंतुलन हमे अनुशासनहीन हीन बना देता ; और हम अपने विवेक का दुरूपयोग करने लगते ! वक़्त से पहले हम कुछ बदल नहीं सकते ; दूसरों से प्रतिस्पर्धा में अक्सर अपना अक्स भूल जाते, रोज परिस्थितयों को दोष देना हमारी कमजोरी का सूचक होता ! ऊपर की विवेचना से आप समीक्षा कर सकते “जन आंदोलन से राजनीति में आये नयी पार्टी के संदर्भ में ; घटना क्रम से जोड़ कर विशेलषण कर सकते की क्या क्या इस सियासत में हुआ !

तो क्या राजनीति को बदलने जो आये थे उनको राजनीति ने ही बदल दिया ; शायद नहीं वो आज भी वैसा ही करेंगे जिस मकसद से जन सैलाब उमड़ा था ! लेकिन उनकी कुछ गलतियाँ जिसका इन्तेजार पुराने राजनीति के दिग्गज कर रहे थे की ये कुछ ऐसा गलती कर जाये की इन्हें संदर्भ विहीन किया जा सके ! और यही हुआ भी ; बिखरे उमीदों को वापस जोड़ना मुश्किल है लेकिन आंदोलन से आगे आये लोगो का राजनैतिक पतन भी एक अवसाद ही होगा हमारे देश के लिए फिर को शिक्षित, युवा अपने देश को बदलने का वीरा उठाने नहीं आयेगा !

बचपन की एक कहानी याद आ गयी ” बाबा भारती को एक घोडा था ; राजा को पसंद आ गया ; बाबा को डर प्रलोभन इत्यादि देने के बाद भी राजा को घोडा नहीं मिलता ; फिर वो भेष बदलकर एक बीमार राहगीर बनकर बाबा को रास्तें में मिलते; बाबा दया भाव से घोड़े पर बिठा कर उसे ले जाने लगते ; राजा चालाकी से घोडा लेके भागने लगता !
बाबा भारती ने कहा घोडा ले जाओ राजन लेकिन ये बात किसी को नहीं कहना की तुमने कैसे घोडा लिया ; लोगो का मानवता पर से, अनजान की मदद से, दयाभाव से विश्वास उठ जायेगा” !

बस विवेकपूर्ण निर्णय लीजिये, सरकार नहीं अपना भविष्य चुनिए “याद रहे कोई भरोसा कोई विश्वास हमेशा के लिये इस समाज से ना उठ जाए” !

— और फिर ….

जनमानस के लिए हर्ष की बात होनी चाहिए जब जब लोकतंत्र विजयी होता है ; आप किसी भी पार्टी विचारधार से जुड़े हो आप भी चाहते इस लोकतंत्र में सभी लोगों की सहभागिता बढे ; क्या आप नहीं चाहते की शिक्षित वर्ग आके सत्ता पर आसिन हो ; जहाँ पर जन जन की विकास की बात हो तो फिर आज विषाद कैसा ? जीत और हार विचारधारा की होती ! और समय के साथ ये परिवर्तित भी होती ; ६० साल से राजनीति की धुरी रही एक पार्टी जिसमें लाल बहादुर, नेहरू, इंदिरा से राजनितिज्ञ रहें आज सन्दर्भविहीन हो रहीं ! ये मात्र बदलाव ही नहीं सजगता का भी परिचायक है ; राजनीति का एकाकीपन भी खतरनाक है और अवसर बनते है नये लोगों के लिए वो आगे आके एक विकल्प बने तो ये देश के लिए एक स्वस्थ परम्परा की शरुवात ही है ! आज प्रधानमंत्री भी एक अपनी दूरदर्शिता लेके केंद्र में है तो दिल्ली की राज्य सरकार में एक नये परिदृश्य को स्वीकार कीजये ! लोकतंत्र विजयी है राष्ट्र प्रगतिशील है और आप सभी जन जन इसके जनक है !

देश की राजनीति में एक नई परिपाटी के जनक को शुभकामनायेँ !!

Written By – Sujit

path in dark life

तमस में होता द्वार कहीं…

path in dark lifeविरह वियोग संयोग है ;
कुछ ऐसा ये तो रोग है !

मृग मारिचका सा क्षण है ;
भ्रम टूटे बस ऐसा प्रयत्न है !

यतार्थ थे तो पास भी थे ;
कृत्रिम पर अधिकार नहीं !

मन चंचल निष्प्राण हो गए ;
जीते जी पाषाण हो गए !

आहट पर सुध नहीं होती ;
मन जैसे कोई जलती अंगीठी !

तमस में होता द्वार कहीं;
जीवन का श्रृंगार यही !

– Sujit

No Way back in life

मंजिल नई बनाऊँगा !

No Way back in lifeअब मैं लौट के नहीं आऊंगा ;
दृढ़ हूँ इस बार बढ़ता ही जाऊँगा ।।

अनेकों बार हुए उपेक्षित मन को ;
अब बहुत ही दुर कहीं ले जाऊँगा ।।

गत वर्षों का कुछ गीत अधूरा ;
अब उसको ना फिर दोहराऊँगा।।

साथ संग कुछ बात रही अधूरी ;
सबसे परे जीवन कहीं बिताऊँगा ।।

बन अनजाने रह किसी नगर पर ;
भले हाल कभी ना सुन पाऊँगा ।।

जब कभी दिखे किसी कहीं डगर पर ;
फिर अपनी नजरें नहीं झुकाऊँगा ।।

होते साथी तो व्यथा कथा संवाद भी होता ;
अनजानों से क्या क्या में कह पाऊँगा ।।

पथ भी व्याकुल मिलने किसी पथिक को ;
अगणित कदम बढ़ाऊँगा मंजिल नई बनाऊँगा ।।

~ Sujit

Visit to Home Town – (Photography)

Journey Begin ….

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चकरी … बैलून … 10 रूपये का मेला ।
वक़्त की रफ्तार बहुत तेज है । जिन्दगी भी तेज चली हो जैसे ….#memoirs

 

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सुप्रभात ….

एक नयी सुबह ।। अपना शहर !!

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गाँव से दुर्गा विसर्जन का एक दृश्य ।

सभी अलग अलग टोले से माँ के कलश को निकाल कर एक जगह एकत्रित होते । यह सामाजिक एकता को भी जीवंत करती । एक जगह सभी जाति समुदाय के लोग आपसी सदभाव के साथ विसर्जन में शामिल होते । ये रंग बिरंगे छाते माँ के कलश के ऊपर उनको छाया देने के लिए रहते की उनको प्रस्थान तक धुप भरे रस्ते में छांव मिले । ये भी सेवा भाव है भगवती के लिए । 

#दुर्गा_पूजा #गाँव_से

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Morning view from window .. A tree with green leafs !

 

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मिर्च का पेड़ ।। #गाँव_से

 

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Ceiling light decoration at home #bhagalpur #sk #htc#red

 

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आज बाजार में सब नया कपड़ा लत्ता ले रहे । कल जागरण के पूजा के बाद सब अगले दिन नया कपड़ा पहन मेला जाते ।। ऐसे भी ये प्रथा महत्वपूर्ण है नये परिधान और साज श्रींगार की चीजे औरत और बच्चे कभी कभार बाजार जाके लेते ।मॉल की तरह मुड शौपिंग नही होता था । खासकर किसान फसल बेच जमा पूँजी से परिवार के हर सदस्य के लिए कपड़े और सब जरुरत की चीज लेते । जागरण के बाद सफ़ेद चावल को पीस कर भगवती को चढ़ाया जाता और अगले दिन उसी से खरीदे हुए हर कपड़े पर छिड़क देते तब उस वस्त्र को आप पहन सकते ।। #गाँव_से

 

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अरहर के खेत ।

#गाँव_से

 

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हीरा और मोती । ( मोती फ्रेम से बाहर हो गया है )

#गाँव_से

 

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खेत खलिहान .. , छोटे पठार । मिलो फैली कृषि भूमि ।। #bihar

 

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Home Ceiling Colourful lights !!

 

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मालगाड़ी . . luggage train staying at station .. #train

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Rainy Day – Sky outside my roof @ Bhagalpur

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चौक .. गाँव से नजदीक का सड़क जहाँ से आवागमन के लिए लोग परिवहन साधनों का इन्तेजार करते ।। #bihar #bihpur#bhagalpur

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गाँव में घोडा गाड़ी को टम-टम कहते है ।

थका हुआ घोड़ा आज काम पर नहीं गया है ।

#गाँव_से

Photo Taken By Sujit @ Bhagalpur, Bihar (Also Some Pics of Home Village Sonbarsha Bihpur)

@ 1 PM – Garden of Joy !! (Photography)

गिलहरी ..

चुपके से पैरों के आसपास आके ;
कौतुहल सी करती ।।
छोटे छोटे हाथों में मूँगफली को भरती;
थोड़ी आहट पर डरती हुई ;
फिर चुपके से फिर पास आने सी लगती ;
कभी कभी दिख जाती एक छोटी सी गिलहरी ।।

#instashot #htc #sk

squirrel

Life is full of choices … #workplace #wall #motivation

workplace quote

फूलों के रंग से दिल की कलम से तुझको लिखी रोज पाती ..
आंधी ने रोका पानी ने टोका दुनिया ने हँसकर पुकारा °●π
Pic : #sk
#flowers #htc #nature

sunflower

देखो मैंने देखा है एक सपना ।। फूलों के शहर में हो घर अपना ।। #htc#click

flower love

When i sharing this beauty of nature; thoughts comes in mind .. my eye witnessed lots of these fancy stuffs in past .. a silent road .. green field of my village.. play ground of my city .. some memories faded .. i missed to capture them .. now smartphone in hand . Technology empowers us to hold the moment .. now i can clicked them .. store them .. thanks to technology … #htc #pic… SK !!

 

nature photography

Old vintage tree .. and green leafs … Like life revitalizing again !!
Photo by #sk

 

old vintage tree

Few weeks ago .. at #saket #delhi सोचे पान खाया जाये ।

PAAN in India

जो मुरझाई फिर कहाँ खिली …
पर बोलो सूखे फूलों पर,
कब मधुवन शोर मचाता है !!

Pic: #sk #htc

flower beauty

धुंध ऐसी नजरों से राह ओझल हो जाये ;
अपनी वजह को लेके फिर भी निकल जा राही ।।

#morning #winter

winter morning Delhi

Photo Taken By : Sujit Kumar

Coin - Childhood

Coins – Random Click !

Coin - Childhood

कोई गुल्लक नहीं ;

बिखेर देना सिक्के ;

ऐसे किसी जगह ;

किसी खिलौने के ख्वाबों के खातिर ;

तोड़ देना मिट्टी के लाल गुल्लक को ;

बचपन में ।

कोई मेहमान हाथ में रख देता था एक रूपये का सिक्का ; और दौड़ के गुल्लक में डाल के ; हाथों में उठा महसूस करता था ,

कितना भारी हुआ है । फिर एक बार हिला के खनखनाहट सुन खुश हो जाता था बचपन । अब सिक्के यूँ ही बिखरें है जैसे किसी सपनों की कीमत ये ना अदा कर पायेंगे ।। #sk

My Photography Collection – City Life (2014)

Delhi tourism “dilli ke pakwan” festival … Entrance roof decorated with colorful umbrellas ….
‪#‎Delhi‬ ‪#‎photography‬ wonderful ‪#‎nightwalk‬ with Dinesh Sharma & Nishant Yadav … !! Awsm taste of कश्मीरी कहवा बादाम चाय 🙂

Delhi Food festival

सर्द सुबह की दस्तक …. [ #Delhi #instaclick ]

City Morning

थोड़ी थोड़ी .. धुंध उतर आयी ।।
अब इस शहर की सुबह भी संवर आयी ।।
#morning #Delhi #click#autumn

winter city morning

भारतीय कला से परिपूर्ण .. घर साज सज्जा की एक दुकान । ।
स्वदेशी वस्तु को बढ़ावा देने से शायद इन कलाकारों को प्रोत्साहन मिले ।।

#India #Art #Delhi #Photography #sk

Indian ethnic art
Captured the city moments .. with my #htc .. #Delhi#night #photography

city moment india

#SK work desk …. Never-ending to do list

sujit work desk
Indian Ethnic Art .. China Clay Flower Stand !! #Delhi#Hauzrani #click #htc #sk

China Clay market india

शीत की रातों में भीगे भीगे लैंप पोस्ट ।

सुनसान सब बेसुध सुबह की आस में ।

#Anvt railway station @4 a.m

lamp post night
Dilli Ke Pakwaan Festival – Food & Drink in Baba Kharak Sing Marg(Connaught Place) Delhi/NCR.

Delhi foods
Rainy night click by sk … The clouds .. They pour their love 2 earth.. now they even not exist in sky
the small droplets witnessed the love on roses & green leafs.. some drops on street.. look the vehicles they weared the vintage looks .. its awesome rainy night … : sujit
#delhi #night #rain #htc

rainy city nights
Winter Night … vegetable stalls in street of Delhi !! Random click : #sk
#photography

winter city market
Winter Night … vegetable stalls in street of Delhi !! Random click : #sk
#photography

evening vegetable market delhi

इस रात को भी गुमां है नीली रौशनी के शहर में रहने का ! – Delhi Night Clicks with MY HTC

City light

Photo Taken By : Sujit Kumar 

our religion

दो बीघा धर्म … !!

टीवी . . अख़बार. . रेडियो. . संसद. . रोड. . बाजार. . चौक. . चौराहा. . !!
देह . . दिमाग . .पेट . . सब जगह धर्म चढ़ गया है !! धर्म पोर्टेबल हो गया – व्यक्ति वस्तु स्थान के हिसाब से बदला जा सकता ! धर्म डॉल्बी डिजिटल साउंड हो गया – संसद में घंटो गले फाड़ चीखा जा सकता ! राजनेता, अध्यापक, लेखक, शिक्षक, कलाकार से लेके सबने अपने अपने रूप में धर्म को विचार, व्यव्हार, आवश्यकता, पेशा के अनुरूप परिभाषित कर दिया कुछ इस तरह …

हम सबने मिलके धर्म को क्या बना डाला कभी सोचा ?

धर्म खबर बन गया ;
धर्म अधर बन गया ;

दो पाटों में पिसता ;
अपनी धुरी पर घिसता ;

धर्म नजर बन गया ;
धर्म बेखबर बन गया ;

धर्म शक बन गया ;
धर्म बेशक बन गया ;

धर्म रंग बन गया ;
धर्म बेरंग बन गया ;

धर्म राग बन गया ;
धर्म बैराग बन गया ;

धर्म हानि बन गया ;
धर्म कहानी बन गया ;

धर्म जाप बन गया ;
धर्म प्रलाप बन गया ;

धर्म काल बन गया ;
धर्म जाल बन गया ;

धर्म संवाद बन गया ;
धर्म विवाद बन गया ;

धर्म राज बन गया ;
धर्म ताज बन गया ;

धर्म नारा बन गया ;
धर्म किनारा बन गया ;

धर्म हुंकार बन गया ;
धर्म पुकार बन गया ;

धर्म बाजार बन गया ;
धर्म औजार बन गया ;

धर्म अर्थ बन गया ;
धर्म व्यर्थ बन गया ;

आखिर हमने इस धर्म को क्या बना दिया …

our religion

वो अबोध बच्चा जिसे कुछ मन्त्रों से अब हिन्दू बना दिया गया; या वो आदिवासी जिसके गले में क्रॉस लटकाकर ईशाई ; या वो गरीब परिवार जिसके नाम में खान या मोह्हमद लगाकर उसे एक नए मजहब मसीहा से जोड़ दिया जाता ! क्या ये दिल से मन से परिवर्तन है ! और परिवर्तन भी तो किस चीज का ? मात्र कर्मकांड और नाम वेश-भूषा धर्म का आवरण हो सकते परिचय तो नहीं !!

वो गरीब किसान तंग आ चूका होगा ; उसे भी सबके तरह अपने पूर्वज से २ बीघा जमीन नहीं मिली खेती करने को ; अपने परिवार का पेट कैसे पालता ; उसे अपना धर्म मालूम था उससे उसने २ बीघा बेच दी ! और आप सब ने अपने भूख के लिए २ बीघा धर्म भी नहीं बेचने दिया उन गरीबों को ; भूख गरीबी ने कमर तोड़ दी थी क्या मंदिर जाता ; कोई निवाला हलक में नहीं जाता क्या देवों को भोग लगाता ; उसी धर्म के नाम से ही सही आप सब उनकी भूख मिटाने के लिए क्यों नहीं आगे आते ? लाखों करोड़ो का आयोजन हो जाता पर ; जुलुस विरोध शोर नारे पर कभी सुना वो आवाज की किस परिस्तिथि ने किसी को अपना धर्म छोड़ने के लिए मजबूर किया होगा !

अक्सर हम सुनते ही है – दक्षिण में गणपति मंदिर, साईं बाबा ट्रस्ट ; अजमेर शरीफ ; बनारस ; वैष्णो देवी मंदिर ! नजाने कितने मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारे के फण्ड रोजाना लबालब होते जा रहे ! सच में अपने धर्म के रक्षक बनते तो उन मासूम , लाचार , बेबस लोगों के लिए आगे आइये की किसी को धर्म की दो बीघा जमीन ना बेचनी पड़े !

सामने रोते बच्चे को रोटी नहीं दे पाने की टिस; गरीबी में जीवन काटकर तिल तिल मरते परिवार; फुटपाथ पर गुजारते और ढंड में कांपते चेहरे ; रोज रात परिवार चलाने की चिंता में झुकते कंधे ;इनसे धर्म पूछते ? हक़ नहीं किसीको ! रोटी, भूख, तड़प, गरीबी का कोई धर्म नहीं !

बाँटिये कम्बल इस सर्द रातों में !
गरीब के मरते बच्चों को अस्पताल ले जाइए !
भूख से सूखे हलक में निवाला डालिये !

तब आप गर्व से अपने धर्म का नाम ले सकते !

उसके कर्म को परिवर्तित कीजये ; नहीं तो दो बीघा धर्म बिकता ही रहेगा !!

धर्म तो अपने कर्म और जीवन के बीच सामंजस्य लाने की व्यवस्था ही तो है ; सत्य, सौहार्द, प्रेम, इंसानियत, प्रकृति ये धर्म से ही तो निहित तो है !

स्वंय विचार कीजये !

– किसी घटना से संबंध नहीं (लेखक के अपने विचार )

#SK – 100 Poems in 2014 : Rewind & Revival !!

शब्दों का सफर ..
थकन सी है मगर ,
विराम नहीं !

# मेरी सर्वाधिक पढ़ी गयी कविता २०१४ की

इस तरह जिन्दगी से कुछ पल उधार लेता हूँ !

# कुछ जीवन और मार्गदर्शन लेख

वंडरलैंड से – Every Morning Wake-up For Your Work Not Just For ur Job !

Three Dimensional View of Life – Come Out From Enigma!!

Are We Working for Bettered version of ourselves?

मायूसी को हँसी बनाएँ – Let’s Live Our Life Each Day With A Smile

जिंदगी अपनी है सवाल भी अपने – Outside Your Comfort Zone

Overwhelming chaos of living – My Quotes

# My English Poetry of 2014 

Wind Chimes – Micro Poetry

Subtle Stubborn Desires – Micro Poetry

Quiet Once – #Micro Poetry

Morning Rhyme – #MicroPoetry

Love of Prophet – #Micropoetry

It’s Now Insanity.. Poetry of Summer memoirs !!

# मेरी पसंदीदा कविता २०१४ की

एक गुड़िया परायी -२

# मेरे नन्हें साथी के लिए लिखी गयी कविता

Your Little Face …. Poem for Little One !!

मेरे नन्हें फ़रिश्ते …

# कुछ देश और समाज से जुडी कवितायेँ 

सरहदें – Wound of Kashmir

ओ कातिल हँसी के – Enemies of Humanity (Terror in Iraq)

तन मन से नमन हो अपने वतन की – #HappyIndependenceDay

# कुछ हटके 

Love in Inbox – #इनबॉक्स_लव

Love in Inbox – #इनबॉक्स_लव – 2

# राजनीती और व्यंग्य 

प्राइम् टाइम में आज .. कहने दो जी कहता रहे .. याहू !! (व्यंग्य)

प्राइम् टाइम – 2 में आज हम काले है तो क्या हुआ (व्यंग्य)

चुनाव सन माइनस २०१४ …

#PledgeToVote – वोट करें ……. !!

# My Audio Poetry – Recites Own Poem in My Voice 

एक पेड़ – Life of a Tree – Hindi Poem Recites By Sujit

#Book Review 

The Alchemist- अल्केमिस्ट पाउलो कोएल्हो – सपनों की अनूठी कहानी !

Series of #Sk Night & Pen

बहुत बड़ा रंगमंच है ये जिंदगी !!

कितना एकाकी है इस भागदौर में इंसान ?? – Thought with Night & Pen

Seashore – Night & Pen

रात की बारिश – Rainy Night & Pen

बोझिल शाम से सुकूने रात – पुरानी जीन्स के संग !!

Life @ Rooftop #ZindgiLive

गिरह – Knot of Life : #Night & #Pen !

शब्दों का कैनवास – Words on Canvas (Night & Pen) : #SK