Poetry

हर सातवें दिन – Night & Pen

आज यादों के कारवां से फिर वही सख्स,
जैसे कल की हो तकरार !
और हर दफा वो जाने के कोशिश करता की,
इस बार नही लौट आने को,
और उसकी ये नाकाम कोशिश साफ़,
 दिख जाती उसके चेहरों पर; !

बेवजह ही सवाल वो अक्सर दुहराता जाता,
 जिसके जवाब खुद उससे ही गुजरते है ..
झट से वो डायरी के खोये पन्ने को पलटता,
सहसा रुक जाता उस एक कोने से मुड़े हुए पन्ने,
देखता फिर वही कुछ बातें, और वो दिन तारीख,
 सब कुछ अजनबी तब .. और अब .. बंद कर के,
डायरी अपनी .. मुस्कुरा सा दिया, हर सातवें दिन तक वो बेफिक्र सा जुदा ..

इन्तेजार जो था उसे आने वाले दिनों का..
वो समझ चूका था रात से दिन के और
इस समय के बदलते तस्वीर में बनते बिगड़ते बातों को मतलब …
इसी तरह इस रात की यही कहानी !

One more Night & Pen with ‪#‎Sujit‬ – Aug, 8, 2013 !!! — feeling Questioning.

Sujit Kumar Lucky
Sujit Kumar Lucky - मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . "यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : - सुजीत भारद्वाज
http://www.sujitkumar.in/