हर सातवें दिन – Night & Pen

आज यादों के कारवां से फिर वही सख्स,
जैसे कल की हो तकरार !
और हर दफा वो जाने के कोशिश करता की,
इस बार नही लौट आने को,
और उसकी ये नाकाम कोशिश साफ़,
 दिख जाती उसके चेहरों पर; !

बेवजह ही सवाल वो अक्सर दुहराता जाता,
 जिसके जवाब खुद उससे ही गुजरते है ..
झट से वो डायरी के खोये पन्ने को पलटता,
सहसा रुक जाता उस एक कोने से मुड़े हुए पन्ने,
देखता फिर वही कुछ बातें, और वो दिन तारीख,
 सब कुछ अजनबी तब .. और अब .. बंद कर के,
डायरी अपनी .. मुस्कुरा सा दिया, हर सातवें दिन तक वो बेफिक्र सा जुदा ..

इन्तेजार जो था उसे आने वाले दिनों का..
वो समझ चूका था रात से दिन के और
इस समय के बदलते तस्वीर में बनते बिगड़ते बातों को मतलब …
इसी तरह इस रात की यही कहानी !

One more Night & Pen with ‪#‎Sujit‬ – Aug, 8, 2013 !!! — feeling Questioning.