Poetry

मेरे हमसफर

यूँ राह में, डगर में, छोड़ के चले जो हमसफर ..
मगरूर बन, आवाज न देंगे, मेरे हमसफर !
गुजरे पल बीते, जैसे बीते गये हर पहर ..
गुम से हुए है गलियों में, ये कैसा शहर !
उठ के फिर से लौट जाती, किनारे से हर लहर..
बेरुखी के दामन ने थामा ऐसे, की फेर ली हर नजर !
कभी जो सोचे, होगी खबर ए हमसफर ..
बीते रात में,यादों को छोड़कर, भूलेगे इस कदर !
कुछ नशा सा हुआ, बस पी गये हर जहर
चलते जा रहे मंजिल पाने हम बन के एक सिफर !
(सुजीत )
** सिफर – शून्य
Sujit Kumar Lucky

Sujit Kumar Lucky – मेरी जन्मभूमी पतीत पावनी गंगा के पावन कछार पर अवश्थित शहर भागलपुर(बिहार ) .. अंग प्रदेश की भागीरथी से कालिंदी तट तक के सफर के बाद वर्तमान कर्मभूमि भागलपुर बिहार ! पेशे से डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल.. अपने विचारों में खोया रहने वाला एक सीधा संवेदनशील व्यक्ति हूँ. बस बहुरंगी जिन्दगी की कुछ रंगों को समेटे टूटे फूटे शब्दों में लिखता हूँ . “यादें ही यादें जुड़ती जा रही, हर रोज एक नया जिन्दगी का फलसफा, पीछे देखा तो एक कारवां सा बन गया ! : – सुजीत भारद्वाज

http://www.sujitkumar.in/